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  • पहल - 111

    भारत के नये हालात बता रहे हैं कि हम एक सूसाइड स्क्वैड के शिकंजे में हैं। हमें एक नागरिक के तौर पर सदा सजग और चैतन्य रहने की आवश्यकता है। जो आदमी सत्ता की लालच में खुद जहरीली दिल्ली को अपनाने चला है वह आपके लिए कोई शस्य श्यामला धरती का टुकड़ा ढूंढ़ कर लायेगा, अगर आप ऐसा भ्रम पालते हैं तो इस पृथ्वी पर आपसे मूर्ख और कोई नहीं है।

    त्रिभुवन
    पहल के पाठक और
    दैनिक भास्कर, उदयपुर संपादक

  • पहल परिचय

    "पहल का प्रकाशन मुख्य रूप से लेखकों - बुद्धिजीविओं के लिए नहीं बल्कि पाठकों की उस बड़ी संख्या के लिए हुआ है जो एक खास तरह की भूमिका के लिए तैयार होने को है। हमारा उद्येश्य क्रन्तिकारी चेतना की व्यापक शिक्षा का है ." इस सुस्पष्ट लक्ष्य के साथ पहले - पहल "पहल" का प्रकाशन 1973 के उत्तरार्ध में हुआ। जो बहुत जल्द ही अग्रिम पंक्ति की पत्रिका बन गई। लगभग चार दशकों से हिंदी साहित्य की साहित्यिक पत्रिकाओं के संसार में "पहल" का नाम महत्वपूर्ण बना हुआ है। इस लम्बे यात्रा काल में "पहल" ने अपने इतिहास में कई अनुभव दर्ज किये। प्रारंभिक दौर में ही इसके तीखे तेवरों से तिलमिलाकर "पहल" पर चौतरफा हमले किये गए, यहाँ तक की इस पर प्रतिबन्ध लगाने और संपादक को गिरफ्तार करने की मांग भी की गई। तत्कालीन नवोदित लेखकों, बुद्धिजीविओं और लघुपत्रिकाओं का इसे निर्बाध लिखित समर्थन मिलता रहा। इतिहास का निर्णय आज सामने है। Read More...

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