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  • पहल - 108

    ''जो मर चुके हैं, सिर्फ वही हमारे अपने होते हैं
    सिर्फ वही चीज़ होती है हमारी अपनी, जिसे
    हम खो चुके होते हैं...
    हर कविता समय के साथ एक शोकगीत बन जाती है
    जिन स्वर्गों को हमने खो दिया है, उसके सिवा कोई स्वर्ग नहीं''
    - लुई बोर्हेस
    गीत चतुर्वेदी के ताज़ा
    कविता संग्रह ''न्यूनतम मैं'' से

    ''जो मृत्यु से पहले मर जाता है
    मृत्यु उसे कभी नष्ट नहीं कर पाती''
    - शाह अब्दुल लतीफ
    सिंधी कवि

    ''कविता गद्य से जन्मी है और वह गद्य में
    लौट जाना चाहती है।
    - लुई बोर्हेस

  • पहल परिचय

    "पहल का प्रकाशन मुख्य रूप से लेखकों - बुद्धिजीविओं के लिए नहीं बल्कि पाठकों की उस बड़ी संख्या के लिए हुआ है जो एक खास तरह की भूमिका के लिए तैयार होने को है। हमारा उद्येश्य क्रन्तिकारी चेतना की व्यापक शिक्षा का है ." इस सुस्पष्ट लक्ष्य के साथ पहले - पहल "पहल" का प्रकाशन 1973 के उत्तरार्ध में हुआ। जो बहुत जल्द ही अग्रिम पंक्ति की पत्रिका बन गई। लगभग चार दशकों से हिंदी साहित्य की साहित्यिक पत्रिकाओं के संसार में "पहल" का नाम महत्वपूर्ण बना हुआ है। इस लम्बे यात्रा काल में "पहल" ने अपने इतिहास में कई अनुभव दर्ज किये। प्रारंभिक दौर में ही इसके तीखे तेवरों से तिलमिलाकर "पहल" पर चौतरफा हमले किये गए, यहाँ तक की इस पर प्रतिबन्ध लगाने और संपादक को गिरफ्तार करने की मांग भी की गई। तत्कालीन नवोदित लेखकों, बुद्धिजीविओं और लघुपत्रिकाओं का इसे निर्बाध लिखित समर्थन मिलता रहा। इतिहास का निर्णय आज सामने है। Read More...

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